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ओवररेटिंग के खेल से लेकर अधिकारियों से कथित सांठगांठ तक—अब उठ रहे गंभीर सवाल

By Admin · 31 Aug 2026 · 18 views
ओवररेटिंग के खेल से लेकर अधिकारियों से कथित सांठगांठ तक—अब उठ रहे गंभीर सवाल

एक सेल्समैन कैसे बना शराब दुकानों का ‘संरक्षक’?

ओवररेटिंग के खेल से लेकर अधिकारियों से कथित सांठगांठ तक—अब उठ रहे गंभीर सवाल

विश्वशनीय सूत्रों के हवाले से प्राप्त 

रायपुर-: राजधानी रायपुर में शराब दुकानों में कथित ओवररेटिंग और उसके पीछे काम करने वाले नेटवर्क को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि वर्ष 2022-23 के दौरान शराब दुकानों में ओवररेटिंग को नियंत्रित करने और व्यवस्था संभालने में दिलीप यादव नामक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

आरोप है कि दिलीप यादव की कथित तौर पर विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ सांठगांठ थी और राजधानी की सिलतरा , ट्रांसपोर्ट नगर, मोवा, पंडरी सहित अन्य शराब दुकानों में ओवररेटिंग का खेल उसकी जानकारी अथवा कथित सहमति से संचालित होता था।

सूत्रों के अनुसार, यदि किसी समाचार पत्र या मीडिया संस्थान द्वारा शराब दुकानों में ओवररेटिंग से जुड़ा मामला प्रकाशित किया जाता था, तो कथित रूप से संबंधित लोगों पर दबाव बनाकर या उन्हें धमकाकर मामले को दबाने का प्रयास किया जाता था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय (ED) छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जिस व्यक्ति पर शराब दुकानों की ओवररेटिंग व्यवस्था से जुड़े होने और अधिकारियों से कथित सांठगांठ के आरोप लग रहे हैं, उसकी भूमिका की जांच अब तक कितनी हुई है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिलीप यादव से पूछताछ होने पर शराब दुकानों में ओवररेटिंग के कथित नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की परतें खुल सकती हैं?

यदि जांच एजेंसियां इन आरोपों और संबंधित दुकानों के रिकॉर्ड की गहराई से पड़ताल करती हैं, तो शराब दुकानों में ओवररेटिंग के कथित खेल से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

जांच के घेरे में क्यों नहीं आया नाम?

शराब घोटाले की जांच के बीच अब यह मांग उठ रही है कि वर्ष 2022-23 के दौरान रायपुर की संबंधित शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों, अधिकारियों और कथित रूप से व्यवस्था संभालने वाले लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि ओवररेटिंग का खेल आखिर किसके संरक्षण में संचालित हो रहा था और इससे किसे लाभ पहुंच रहा था।

अब निगाहें जांच एजेंसियों पर हैं—क्या शराब दुकानों की ओवररेटिंग के कथित खेल की परतें खुलेंगी, या फिर यह मामला भी सवालों के बीच दबकर रह जाएगा?

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