सरपंच के निजी खाते में 15 लाख ट्रांसफर करने का दावा; 15 दिन में जांच न होने पर कलेक्ट्रेट में भूख हड़ताल की चेतावनी
सूरजपुर / प्रेमनगर -जनपद पंचायत प्रेमनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत नवापारा कला में विकास कार्यों और सरकारी मद की राशि के उपयोग को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। पंचायत में 15वें वित्त आयोग सहित विभिन्न मदों में प्राप्त राशि में 53 लाख रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए पूर्व सरपंच दशाराम शांडिल्य एवं ग्रामीणों ने सूरजपुर जिला कलेक्टर के जनदर्शन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के साथ बैंक आहरण एवं संबंधित दस्तावेजों की छायाप्रतियां भी संलग्न की गई हैं (टोकन क्रमांक: 2250326002369)।
शिकायतकर्ताओं का सीधा आरोप है कि वर्तमान सरपंच प्रभु नारायण सिंह और पंचायत सचिव की मिलीभगत से पंचायत के फंड से जमकर फर्जीवाड़ा किया गया है। आरोप के मुताबिक, धरातल पर वास्तविक निर्माण कार्य कराए बिना ही केवल कागजों पर बिल-वाउचर तैयार कर सरकारी खजाने से राशि का आहरण कर लिया गया।
ग्रामीणों ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि वर्तमान सरपंच के व्यक्तिगत बैंक खाते में 15 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई है, साथ ही कुछ निर्वाचित पंचों के नाम पर भी नियमविरुद्ध भुगतान दर्शाया गया है।
1 अप्रैल 2025 से 31 अगस्त 2026 तक के रिकॉर्ड की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से मांग की है कि 1 अप्रैल 2025 से 31 अगस्त 2026 तक की अवधि के दौरान हुए सभी वित्तीय लेन-देन, बैंक स्टेटमेंट, बिल-वाउचर, मस्टररोल और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्रों (CC) का मौके पर मौजूद कार्यों से भौतिक मिलान कराया जाए। इसके लिए स्वतंत्र तकनीकी व प्रशासनिक टीम गठित कर वित्तीय ऑडिट और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस जांच कराने की मांग रखी गई है।
15 दिन का अल्टीमेटम, कलेक्ट्रेट में भूख हड़ताल की चेतावनी
पूर्व सरपंच दशाराम शांडिल्य और ग्रामीणों का कहना है कि यह जनता के गाढ़े पसीने और गांव के बुनियादी विकास का पैसा है। यदि प्रशासन ने 15 दिनों के भीतर इस पर ठोस जांच और वैधानिक कार्रवाई शुरू नहीं की, तो समस्त ग्रामीण सूरजपुर कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
मामले में उठते सीधे व तीखे सवाल
सरपंच के निजी खाते में 15 लाख कैसे पहुंचे?
पंचायती राज नियमों के तहत विकास कार्यों का भुगतान सीधे वेंडर या संबंधित एजेंसी को नियमानुसार होना चाहिए। ऐसे में सरपंच के व्यक्तिगत खाते और पंचों के नाम पर शासकीय राशि कैसे और किस अधिकार से ट्रांसफर की गई?
बिना भौतिक सत्यापन के बिल कैसे पास हुए?
जब जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य मौजूद ही नहीं हैं, तो जनपद के तकनीकी अमले (उप अभियंता/एसडीओ) ने मूल्यांकन और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र (CC) किस आधार पर जारी किया?
पर्यवेक्षण स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी अब तक खामोश क्यों थे?
डेढ़ साल से अधिक समय तक लाखों रुपये का संदिग्ध आहरण चलता रहा, लेकिन जनपद स्तर पर होने वाले नियमित सोशल ऑडिट और वित्तीय समीक्षा बैठकों में यह गड़बड़ी पकड़ में क्यों नहीं आई?
क्या होगी वसूली और दर्ज होगी एफआईआर?
क्या छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 व 92 के तहत संबंधितों पर निलंबन, रिकवरी और शासकीय धन के गबन का आपराधिक प्रकरण दर्ज होगा, या मामला जांच फाइलों में दबा दिया जाएगा?
(नोट: इस मामले में वर्तमान सरपंच प्रभु नारायण सिंह और पंचायत सचिव का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, किंतु उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)



