खोंगापानी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर)।
एक ओर जहां प्रदेश भर के हर शासकीय आयोजन में 'छत्तीसगढ़ महतारी' के राज्यगीत पर समूचा प्रशासनिक अमला सम्मान में नतमस्तक खड़ा नजर आता है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उसी महतारी की प्रतिमा के इर्द-गिर्द पसरी गंदगी नगर पंचायत प्रशासन की संवेदनहीनता की पोल खोल रही है। नगर पंचायत खोंगापानी में स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के आसपास इन दिनों कूड़े-कचरे और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि नगर पंचायत सीमा में दाखिल होते ही स्वच्छ भारत मिशन दम तोड़ता नजर आ रहा है।
महतारी की प्रतिमा के पास कचरा, तो वार्डों का क्या हाल?
छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के पास फैली बदहाली केवल एक स्थल की उपेक्षा नहीं, बल्कि नगर पंचायत की समूची सफाई व्यवस्था के ठप होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब नगर के मुख्य चौराहे पर स्थापित राज्य की आराध्य प्रतिमा के आसपास नियमित झाड़ू तक नहीं लग पा रही है, तो अंदरूनी वार्डों और बस्तियों की दशा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। नगर के अधिकांश वार्डों में नालियां बजबजा रही हैं और कचरे के ढेर बजबजाती गंदगी में तब्दील हो रहे हैं।
कागजों में सिमटा स्वच्छ भारत मिशन
खोंगापानी नगर पंचायत में स्वच्छता के नाम पर बैठकों और अभियानों की औपचारिकता तो खूब निभाई जाती है, लेकिन धरातल पर स्वच्छता अभियान महज एक कागजी कोरम बनकर रह गया है। सफाई कर्मियों की निगरानी और कचरा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी पसर रही है।
जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार मौन
नगर में पसरी इस दुर्दशा पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। नागरिकों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि जिस महतारी के नाम पर राजनीति और सम्मान की कसमें खाई जाती हैं, उसी प्रतिमा परिसर को कचराघर बनने के लिए छोड़ दिया गया है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और प्रतिमा परिसर सहित पूरे नगर में नियमित व व्यवस्थित सफाई सुनिश्चित की जाए।



