मानवता, सेवा और सामाजिक समर्पण की मिसाल को मिला राष्ट्रीय सम्मान
अंबिकापुर से उठी सेवा की आवाज बन रही राष्ट्रीय पहचान, “साउथ एशिया जन सरोकार सम्मान” एवं “द एक्टिविस्ट नेशनल अवॉर्ड 2026” से सम्मानित
अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़। सरगुजा जिले की धरती से समाज सेवा, मानवता और जनकल्याण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करने वाले युवा सामाजिक कार्यकर्ता एवं “अनोखी सोच” संस्था के संस्थापक-अध्यक्ष सूर्य प्रकाश साहू को उनके उल्लेखनीय सामाजिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित “साउथ एशिया जन सरोकार सम्मान” एवं “द एक्टिविस्ट नेशनल अवॉर्ड 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें समाज सेवा, युवा जागरूकता, मानवता, पर्यावरण संरक्षण तथा जरूरतमंदों की सहायता के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
अंबिकापुर में आयोजित भव्य राष्ट्रीय समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, कलाकारों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में उनके साथ उनकी समर्पित टीम के कार्यों की भी सराहना की गई।
सेवा की सोच बनी सामाजिक आंदोलन
आज जब समाज सेवा कई बार औपचारिकताओं तक सीमित होती दिखाई देती है, ऐसे समय में सूर्य प्रकाश साहू ने अपने कार्यों से यह सिद्ध किया है कि सेवा का वास्तविक अर्थ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उनकी संस्था “अनोखी सोच” केवल एक संगठन नहीं, बल्कि मानवता, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का एक जीवंत आंदोलन बन चुकी है।
अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों में संस्था ने अनेक ऐसे कार्य किए हैं, जिनका सीधा लाभ समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचा है। संस्था का मूल उद्देश्य समाज के उन लोगों तक सहायता पहुंचाना है, जिनकी आवाज अक्सर मुख्यधारा तक नहीं पहुंच पाती।
कोरोना काल में बनी उम्मीद की किरण
कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा देश भय और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था, तब “अनोखी सोच” ने मानवता की मिसाल पेश की। संस्था के कार्यकर्ताओं ने जरूरतमंद परिवारों तक राशन, भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने का कार्य किया।
उस कठिन दौर में जब कई लोग संक्रमित मरीजों और मृतकों से दूरी बना रहे थे, तब सूर्य प्रकाश साहू एवं उनकी टीम जरूरतमंदों के साथ मजबूती से खड़ी दिखाई दी। उन्होंने न केवल राहत कार्यों में भाग लिया बल्कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाकर मानवता का परिचय दिया।
अंतिम यात्रा में भी नहीं छोड़ा साथ
“अनोखी सोच” की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संस्था ने समाज सेवा को केवल जीवित लोगों की सहायता तक सीमित नहीं रखा। आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय एवं बेसहारा परिवारों के सैकड़ों परिजनों के अंतिम संस्कार में संस्था ने सहयोग प्रदान किया है।
जब कई परिवार आर्थिक तंगी और सामाजिक मजबूरियों के कारण अपने प्रियजनों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने में असमर्थ थे, तब सूर्य प्रकाश साहू और उनकी टीम ने आगे बढ़कर हर संभव सहायता प्रदान की। आर्थिक सहयोग के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं और सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित करना संस्था की पहचान बन चुका है।
सूर्य प्रकाश साहू का मानना है कि “सच्ची मानवता केवल जीवन में साथ देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि अंतिम यात्रा में भी किसी परिवार को अकेला महसूस नहीं होने देना चाहिए।”
शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहायता में सक्रिय भूमिका
संस्था लगातार गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सहायता और सामाजिक सुरक्षा के लिए कार्य कर रही है। अनेक परिवारों को आर्थिक सहयोग, शिक्षा सामग्री वितरण, जरूरतमंद मरीजों को उपचार हेतु एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराना तथा जरूरतमंदों की हर संभव सहायता करना संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल है।
ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में भी संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कई गंभीर मरीजों को सैकड़ों किलोमीटर दूर बेहतर उपचार के लिए पहुंचाने का कार्य संस्था ने किया है।
संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का संवाहक
“अनोखी सोच” सामाजिक सेवा के साथ-साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्था द्वारा अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुओं को प्रयागराज महाकुंभ, विभिन्न तीर्थस्थलों एवं धार्मिक यात्राओं में सहभागी बनाया गया है।
इन यात्राओं का उद्देश्य केवल दर्शन कराना नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक एकता को मजबूत करना है। संस्था का मानना है कि सामाजिक विकास के साथ सांस्कृतिक चेतना भी आवश्यक है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने सूर्य प्रकाश साहू
आज के समय में जब युवा वर्ग सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर होता जा रहा है, ऐसे में सूर्य प्रकाश साहू ने युवाओं को समाज सेवा की मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है। उनकी संस्था से जुड़े अनेक युवा रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, पशु-पक्षियों के लिए भोजन सेवा, जनजागरूकता रैलियों और आपदा राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
उनकी कार्यशैली युवाओं को यह संदेश देती है कि वास्तविक परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों से आता है।
सम्मान को बताया टीम और समाज की उपलब्धि
राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने के बाद सूर्य प्रकाश साहू ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उनकी पूरी टीम और उन सभी लोगों का है जिन्होंने समाज सेवा की इस यात्रा में उनका साथ दिया।
उन्होंने “द एक्टिविस्ट” एवं “जन सरोकार” परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अंबिकापुर में आयोजित ऐसा ऐतिहासिक कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, जहां देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रबुद्धजन और समाजसेवी एक मंच पर एकत्रित हुए। उन्होंने कहा कि समाज के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करना नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का कार्य करता है।
सेवा की पहचान स्वयं बन जाती है
आज “अनोखी सोच” केवल एक संस्था नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता की पहचान बन चुकी है। सूर्य प्रकाश साहू और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया है कि समाज सेवा किसी प्रचार या पहचान की मोहताज नहीं होती। यदि नीयत साफ हो और उद्देश्य जनकल्याण हो, तो सीमित संसाधनों में भी समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है।
अंबिकापुर से शुरू हुई यह सेवा यात्रा अब पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है और आने वाले समय में समाज सेवा के क्षेत्र में एक नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
वास्तव में “अनोखी सोच” केवल एक नाम नहीं, बल्कि मानवता की जीवंत मिसाल है, और सूर्य प्रकाश साहू उस सोच के ऐसे संवाहक हैं जिन्होंने सेवा को अपना धर्म और समाज को अपना परिवार बना लिया है।