सरगुजा ओलंपिक बना 'अव्यवस्था का अखाड़ा': अन्य जिलों में ड्रेस-सुविधा, यहां आधी रात तक बेबस बैठे रहे सीतापुर के बच्चे?
अंबिकापुर। सरगुजा ओलंपिक के आयोजन में सामने आई अव्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। सीतापुर विकासखंड से प्रतियोगिता में शामिल होने आए खिलाड़ियों को समापन के बाद घर लौटने के लिए देर रात तक इंतजार करना पड़ा था। बच्चों को वापस भेजने की व्यवस्था में हुई देरी को गंभीरता से लेते हुए जिला खेल अधिकारी राम कुमार सिंह और जनपद पंचायत सीतापुर के सीईओ जय गोविंद गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जिला पंचायत सीईओ ने लिया संज्ञान
दरअसल जिला मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित सरगुजा ओलंपिक में जिले के सात विकासखंडों से 300 से अधिक खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में खिलाड़ियों के रहने और खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन समापन के दिन सीतापुर से आए खिलाड़ियों को घर वापस भेजने के लिए वाहन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं समय पर नहीं हो सकीं। इसके चलते बच्चे ठंड के बीच देर रात तक स्टेडियम में खुले आसमान के नीचे बैठे रहे। खाने-पीने की व्यवस्था नहीं होने से भी खिलाड़ियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। मामले की जानकारी सामने आने के बाद मीडिया की दखल पर जिला पंचायत सीईओ ने तत्काल संज्ञान लिया और खिलाड़ियों के लिए खाने-पीने के साथ घर वापस जाने की व्यवस्था कराई। इसके बाद अब जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
ड्रेस नहीं मिलने और आयोजन के समय पर भी उठे सवाल
सरगुजा ओलंपिक के आयोजन में अव्यवस्था का यह पहला मामला नहीं है। अन्य जिलों में खेल युवा कल्याण विभाग की ओर से खिलाड़ियों को ड्रेस उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है। जबकि सरगुजा में खिलाड़ियों को ड्रेस नहीं मिल सकी। इसे विभाग की दूसरी बड़ी लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है। वहीं तीन दिनों तक चले इस आयोजन के शुभारंभ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रतियोगिता का शुभारंभ शाम के समय किया गया, जबकि आयोजन की शुरुआत सुबह से होनी थी। लाखों रुपये खर्च कर आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में खिलाड़ियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पाईं।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में सीतापुर विकासखंड से आए खिलाड़ियों को लाने और वापस ले जाने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। संबंधित जनपद पंचायत सीईओ जय गोविंद गुप्ता पर पूर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार को लेकर एफआईआर दर्ज होने का मामला भी सामने आया था। ऐसे में उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारी और मौजूदा मामले में भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
कार्रवाई के बाद भी बड़ा सवाल बरकरार
सरगुजा ओलंपिक का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को मंच देना और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना था। लेकिन आयोजन के अंतिम दिन सामने आई अव्यवस्थाओं ने खेल युवा कल्याण विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि कारण बताओ नोटिस के जवाब के बाद प्रशासन केवल औपचारिक कार्रवाई करता है या खिलाड़ियों को हुई परेशानी के लिए वास्तविक जिम्मेदारी तय कर ठोस कदम भी उठाएगा।
जनहित से जुड़े सीधे सवाल
1. लाखों के खर्च के बाद भी बुनियादी सुविधाएं नदारद क्यों? जब बजट में वाहन, भोजन और किट का प्रावधान था, तो ऐन वक्त पर बच्चों को भूखा क्यों छोड़ दिया गया?
2. जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में चूक कैसे हुई? क्या जिला प्रशासन के पास फील्ड पर समन्वय जांचने की कोई स्वतंत्र मॉनिटरिंग टीम नहीं थी?
3. क्या नोटिस के आगे भी बढ़ेगी कार्रवाई? क्या प्रशासन केवल 'जवाब' मांगकर फाइल बंद कर देगा, या खिलाड़ियों को मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना देने वालों की वेतन कटौती व विभागीय जांच जैसे ठोस कदम उठाएगा?



