कोरबा नगर निगम की ‘लाइब्रेरी ऑन व्हील्स’ बनी आकर्षण का केंद्र, रोजाना 25 से 30 लोग पहुंचकर कर रहे पुस्तकें पढ़ने का अभ्यास
कोरबा। मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोगों को किताबों से जोड़ने तथा पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम कोरबा ने एक अनूठी पहल की है। निगम की पुरानी और अनुपयोगी बस को आधुनिक वातानुकूलित पुस्तकालय में परिवर्तित कर ‘लाइब्रेरी ऑन व्हील्स’ की शुरुआत की गई है। ‘कबाड़ से जुगाड़’ की अवधारणा पर आधारित यह पहल न केवल संसाधनों के पुनः उपयोग का संदेश दे रही है, बल्कि बच्चों और युवाओं को डिजिटल दुनिया से कुछ समय दूर रहकर पुस्तकों के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित भी कर रही है।
बेकार बस को दिया पुस्तकालय का नया रूप
नगर निगम के टर्मिनल में लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी बस को निगम की टीम और कारीगरों ने नया स्वरूप दिया है। बस के भीतर पुस्तकों के लिए आकर्षक रैक, बैठने की सुविधाजनक व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी और वातानुकूलन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस तरह अनुपयोगी संसाधन को उपयोगी बनाकर अध्ययन के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य यह संदेश देना भी है कि उचित योजना और रचनात्मक सोच के माध्यम से पुराने संसाधनों का पुनः उपयोग कर जनहित में उपयोगी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
डिजिटल डिटॉक्स के साथ किताबों से दोस्ती
आज स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया लोगों की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के बीच स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय बढ़ने के कारण पुस्तकों के नियमित अध्ययन की आदत प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में लाइब्रेरी ऑन व्हील्स लोगों को पढ़ने की ओर प्रेरित करने का एक सार्थक प्रयास है।
इस पुस्तकालय में बच्चों की कॉमिक्स, कहानियों की पुस्तकें, सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। यहां आने वाले पाठक अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकें पढ़ सकते हैं और शांत वातावरण में अध्ययन कर सकते हैं।
फिलहाल यह बस घंटाघर चौक और स्मृति उद्यान के सामने खड़ी रहती है। नगर निगम की योजना के अनुसार, आने वाले समय में इसे शहर के विभिन्न वार्डों, बस्तियों, पार्कों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाने की दिशा में विस्तार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
रोजाना 25 से 30 लोग पहुंच रहे पढ़ने
लाइब्रेरी की देखरेख करने वाले केयरटेकर पुरुषोत्तम के अनुसार, यहां प्रतिदिन लगभग 25 से 30 लोग पुस्तकें पढ़ने के लिए पहुंचते हैं। पाठक अपनी पसंद की किताब लेकर औसतन एक से डेढ़ घंटे तक अध्ययन करते हैं। इस दौरान उन्हें मोबाइल फोन से दूर रहकर पढ़ने का अवसर मिलता है।
शुरुआती स्तर पर मिल रही यह प्रतिक्रिया पठन-पाठन की आदत को प्रोत्साहित करने के लिहाज से उत्साहजनक है। हालांकि, इस पहल का व्यापक प्रभाव इसके नियमित संचालन, पुस्तकों की उपलब्धता और शहर के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच पर भी निर्भर करेगा।
साहित्यकारों की स्मृति में पहल
नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय के अनुसार, निगम के पास उपलब्ध एक अनुपयोगी बस को ‘कबाड़ से जुगाड़’ की परिकल्पना के तहत पुस्तकालय में परिवर्तित किया गया है। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए शहर में पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि यह पुस्तकालय किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में शहर के अलग-अलग हिस्सों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाने की योजना है।
इस पहल की शुरुआत प्रदेश के ख्यातिलब्ध साहित्यकारों विनोद कुमार शुक्ल और सुरेंद्र दुबे की स्मृति में की गई है, ताकि साहित्य और अध्ययन के प्रति लोगों की रुचि को बढ़ावा दिया जा सके।
विशेषज्ञों ने बताया डिजिटल डिटॉक्स का महत्व
शासकीय ईवीपीजी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अवंतिका कौशिल के अनुसार, आधुनिक जीवन में डिजिटल उपकरणों और सोशल मीडिया का उपयोग काफी बढ़ गया है। लगातार स्क्रीन के सामने समय बिताने से शारीरिक गतिविधियों, आंखों के आराम, गर्दन पर पड़ने वाले दबाव और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। अत्यधिक डिजिटल व्यस्तता का असर एकाग्रता और सोचने-समझने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने स्क्रीन टाइम को संतुलित रखने और नियमित रूप से डिजिटल उपकरणों से विराम लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। ऐसे में पुस्तक पढ़ना, शारीरिक गतिविधियों में भाग लेना और परिवार के साथ समय बिताना दैनिक जीवन में बेहतर संतुलन बनाने के उपयोगी तरीके हो सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा का संगम
कोरबा नगर निगम की लाइब्रेरी ऑन व्हील्स शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता को एक साथ जोड़ने वाली पहल है। पुरानी बस का पुनः उपयोग संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत करता है, वहीं यह पुस्तकालय लोगों को ज्ञान, साहित्य और अध्ययन की ओर आकर्षित करने का अवसर देता है।
यदि इस पहल का नियमित संचालन किया जाता है और इसे शहर के अधिक से अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है, तो यह बच्चों, युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। साथ ही, यह पहल दूसरे नगरीय निकायों को भी अनुपयोगी संसाधनों का रचनात्मक इस्ते
माल करने के लिए प्रेरित कर सकती है।



