The Activist TV Power of The People

जिस परिवार को 50 साल पहले दी थी छत, उसी ने मिटा दिया वंश: लखनऊ तिहरे हत्याकांड में तीन पीढ़ियों का अपनापन लहूलुहान

गाड़ी खड़ी करने के मामूली विवाद में उजड़ा तिवारी परिवार; पिता, चाचा और बेटे की हत्या के बाद घर में बचीं सिर्फ तीन बेबस महिलाएं

By Admin · 02 Nov 2026 · 74 views
जिस परिवार को 50 साल पहले दी थी छत, उसी ने मिटा दिया वंश: लखनऊ तिहरे हत्याकांड में तीन पीढ़ियों का अपनापन लहूलुहान

लखनऊ। जिस परिवार को पूर्वजों ने कभी बेघर होने से बचाया, 10 साल तक बिना किराए के सिर पर छत दी और जिनके साथ तीन पीढ़ियों तक सुख-दुख साझा किए—उसी परिवार ने चंद गज जमीन और गाड़ी पार्किंग के विवाद में पूरे कुल का नामोनिशान मिटा दिया। नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में हुए सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड ने न केवल इलाके को दहला दिया है, बल्कि इंसानियत और 50 साल पुराने आत्मीय रिश्तों को भी तार-तार कर दिया है।

तीन पुरुषों की अर्थी उठते ही बुझ गया घर का चिराग

इस खूनी वारदात में शिवाजी तिवारी, उनके छोटे भाई शिवेंद्र तिवारी उर्फ शंभू और उनके 20 वर्षीय बेटे सुयश तिवारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। एक ही झटके में हंसते-खेलते परिवार के तीनों पुरुषों की जान ले ली गई। अब इस अभागे घर में सिर्फ मातम, चीखें और तीन बेबस महिलाएं—शिवाजी की पत्नी ऊषा तिवारी, शिवेंद्र की पत्नी रुचि तिवारी और उनकी मासूम बेटी सुमेधा ही बची हैं।

50 साल पहले दी थी पनाह, नौकरी भी लगवाई

मृतक शिवाजी तिवारी के फुफेरे भाई मनोज अवस्थी ने रुंधे गले से बताया कि करीब 50 साल पहले शिवाजी के पिता चंद्रभान तिवारी ने आरोपित परिवार के तत्कालीन मुखिया डीके शुक्ला को नौबस्ता कालोनी में न सिर्फ रहने की जगह दी थी, बल्कि करीब एक दशक तक उनसे एक रुपया किराया तक नहीं लिया। इतना ही नहीं, चंद्रभान तिवारी ने अपने रसूख से डीके शुक्ला की हरदोई स्थित काटन मिल में नौकरी भी लगवाई थी।

दोनों परिवारों का मेलजोल ऐसा था कि एक-दूसरे के घर की रसोई तक बेरोक-टोक आना-जाना था। बच्चे एक-दूसरे के माता-पिता को चाचा-चाची कहते थे और दोनों परिवारों की महिलाएं सगी बहनों की तरह रहती थीं।

एक ही रिक्शे से स्कूल जाते थे सुयश और ऋषभ

मृतक सुयश तिवारी और आरोपित परिवार का बेटा ऋषभ बचपन के जिगरी दोस्त थे। दोनों की प्राथमिक शिक्षा सीएमएस अशरफाबाद से हुई। ऋषभ हालांकि एक कक्षा आगे था, फिर भी दोनों एक ही रिक्शे से स्कूल जाते, साथ खेलते और मेले-बाजार का आनंद लेते थे। जिस दोस्त के कंधे पर हाथ रखकर बचपन गुजरा, उसी परिवार के खूनी मंसूबों ने सुयश की जान ले ली।

6 महीने में पार्किंग का विवाद बना कत्ल की वजह

इलाकाई लोगों के मुताबिक, बरगद के पेड़ के पास चंद कदम जमीन पर कार खड़ी करने को लेकर छह महीने पहले दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई थी। देखते ही देखते यह मामूली तकरार गहरी रंजिश में बदल गई। छह महीने के भीतर उपजे इस अहंकार और नफरत ने 50 साल के रिश्ते को हमेशा के लिए दफन कर दिया और एक परिवार का वंश ही खत्म कर दिया।

Admin
Author
Admin

Related News