जेसीबी-क्रेन से रात में लोडिंग, सुबह वन विभाग की दबिश
7–8 लाख की वन संपदा पर डाका, विभाग ने पकड़ा रंगे हाथ
झारखंड नंबर ट्रक से 7–8 लाख की अवैध लकड़ी जब्त, कोरिया–सोनहत वन विभाग की बड़ी कार्रवाई
सोनहत (कोरिया) – कोरिया–सोनहत वन मंडल की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए झारखंड नंबर के एक ट्रक से लाखों रुपये मूल्य की अवैध लकड़ी जब्त की है। बरामद लकड़ी की बाजार कीमत लगभग 7 से 8 लाख रुपये आंकी जा रही है। इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय लकड़ी तस्करों के बीच हड़कंप मच गया है।
वन विभाग को सूचना मिली थी कि झारखंड पासिंग ट्रक (क्रमांक JH02AF0673) के जरिए कीमती लकड़ियों की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने विशेष टीम गठित कर सोनहत के बेलिया जंगल क्षेत्र में नाकेबंदी की। जांच के दौरान ट्रक को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें भारी मात्रा में कीमती लकड़ी के बोटे (लॉग्स) बरामद हुए। मौके का फायदा उठाकर चालक फरार हो गया।
सूत्रों के अनुसार, जब कार्रवाई चल रही थी, तब कुछ स्थानीय व्यक्तियों द्वारा हस्तक्षेप कर कार्रवाई रोकने का प्रयास किया गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस बल को भी बुलाना पड़ा। वन विभाग की टीम ट्रक को जब्ती कर डिपो ले गई। बताया जाता है कि मीडिया कवरेज के दौरान भी कुछ लोग मौके पर मौजूद रहे, जो कैमरा शुरू होते ही वहां से चले गए।
सिंगल परमिट की आड़ में तस्करी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्राइवेट भूमि के नाम पर सिंगल परमिट बनवाकर उसकी आड़ में अवैध लकड़ी परिवहन किया जा रहा था। वन अधिकारियों ने परमिट और टीपी (ट्रांजिट पास) की जांच के बाद ट्रक और लकड़ी को जब्त कर वन उपज व्यापार अधिनियम 1964 के तहत कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
वन विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि लकड़ी को जेसीबी और क्रेन की मदद से रात में लोड किया गया था। सूचना मिलते ही मशीनें मौके से फरार हो गईं। ट्रक को विभागीय डिपो में सुरक्षित खड़ा कराया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
लोध छाल तस्करी भी चर्चा में
क्षेत्र में लोध पेड़ की छाल की तस्करी भी लंबे समय से चर्चा में है। बताया जाता है कि सोनहत से रामगढ़-छतरंग जंगल क्षेत्र तक लोध छाल को ग्रामीणों के माध्यम से कम कीमत पर खरीदकर सूरजपुर और अंबिकापुर के बाजारों में 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बेचा जाता है। अगरबत्ती, साबुन और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं में प्रयुक्त होने वाली यह छाल तस्करों के लिए ‘सोने की खान’ साबित हो रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वन संपदा को भारी नुकसान हो सकता है। फिलहाल वन विभाग की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन यह भी देखना होगा कि तस्करी नेटवर्क के पीछे के मुख्य सरगनाओं तक विभाग कब और कैसे पहुंचता है।