ताले में बंद अस्पताल, दवाओं की कथित बिक्री से पशुपालकों में आक्रोश
शहडोल जिले के सिधी स्थित शासकीय पशु औषधालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल अधिकांश समय बंद रहता है और तैनात कर्मचारी नियमित रूप से उपस्थित नहीं होते। आपात स्थिति में पशुपालकों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कर्मचारी ड्यूटी स्थल पर न रहकर “भ्रमण” के नाम पर बाहर रहते हैं। वहीं पशुओं के नाम पर मिलने वाली शासकीय दवाओं की कथित रूप से बिक्री किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। बीमार पशुओं के इलाज में लापरवाही से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि पशुधन ही उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। ऐसे में यदि शासकीय पशु चिकित्सा केंद्र निष्क्रिय हो जाए, तो इसका सीधा असर किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं पशु चिकित्सा विभाग से उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह शासकीय दायित्वों की खुली अवहेलना और पशुपालकों के साथ अन्याय है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को किस स्तर पर संज्ञान में लेकर क्या कदम उठाता है।