दूषित पानी या लापरवाही? पीलिया मामले में महापौर ने मांगा जवाब
नालियों की सफाई में लापरवाही से बढ़ा संक्रमण का खतरा? महापौर का बड़ा बयान
आदित्य गुप्ता
अंबिकापुर। अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र के नवागढ़, घुटरापारा व मोमिनपुरा इलाके में पीलिया के बढ़ते मामलों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। बीते चार दिनों में लगभग 56 मरीजों के सामने आने के बाद स्थिति गंभीर मानी जा रही है। इसी बीच महापौर श्रीमती मंजूषा भगत ने मंगलवार को बयान देते हुए कहा कि पीलिया फैलने के पीछे “किसी षड्यंत्र की बू” आ रही है तथा नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें एवं निगम आयुक्त को समय पर सूचना नहीं दी गई।
महापौर ने निरीक्षण के दौरान कहा कि दूषित पानी की सप्लाई की जानकारी उन्हें पूर्व में नहीं दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नालियों की सफाई लंबे समय से नहीं होने से संक्रमण का खतरा बढ़ा है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि समस्या पहले से थी तो निगम प्रशासन को समय रहते अवगत क्यों नहीं कराया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आज महापौर श्रीमती मंजूषा भगत के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों, नगर निगम टीम एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने मोमिनपुरा, आयान मार्ग व नवागढ़ क्षेत्र का स्थल निरीक्षण किया। स्वास्थ्य विभाग, सफाई विभाग एवं जलप्रदाय विभाग की टीमों को नियमित जांच, सफाई अभियान और जल आपूर्ति की सघन मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए। पानी की जांच रिपोर्ट रायपुर भेजी गई है, जिसकी पुष्टि के बाद ही बीमारी के वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मोमिनपुरा क्षेत्र में 100 से अधिक संदिग्ध मरीजों के नमूने लिए गए हैं और जांच प्रक्रिया जारी है। प्रशासन द्वारा जल आपूर्ति नेटवर्क की मरम्मत, पाइपलाइन लीकेज की जांच, क्लोरीनेशन और विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। नागरिकों से उबला हुआ पानी पीने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई है।
निरीक्षण के दौरान एमआईसी सदस्य श्री मनीष सिंह, श्रीमती प्रियंका गुप्ता, नितिन गुप्ता, अजय सारथी, विकास गुप्ता, प्रशांत पांडेय, जल विभाग के प्रभारी प्रशांत खुल्लर, इंजीनियर सतीश रवि, स्वास्थ्य विभाग से अनिल पांडे सहित स्वास्थ्य कर्मी, सफाई कर्मी, जल प्रदाय विभाग के कर्मचारी व वार्डवासी उपस्थित रहे। नगर निगम एवं स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पीलिया फैलने के पीछे दूषित जल आपूर्ति, सफाई में लापरवाही या अन्य कोई कारण जिम्मेदार है। फिलहाल प्रशासन अलर्ट मोड पर है और प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी जारी है।