सूरजपुर। एक तरफ शासन बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए पोषण आहार और चावल उपलब्ध करा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसी निवाले पर सिस्टम और बिचौलियों की गिद्ध दृष्टि जमी हुई है। जिले में आंगनबाड़ी केंद्र से बच्चों का चावल चोरी होने और बाद में स्थानीय पुलिस चौकी में इस गंभीर अपराध पर कानूनी कार्रवाई करने के बजाय 'समझौते' का ठप्पा लगाकर मामला दबा दिए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने खाकी की कार्यप्रणाली और कर्तव्यनिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या अब सरकारी संपत्ति की चोरी और नौनिहालों के हक पर डाका डालने जैसे गैर-जमानती कृत्य का निपटारा पुलिस चौकियों में आपसी बातचीत से तय होगा?
सेंधमारी से लेकर चौकी तक की इनसाइड स्टोरी
सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्र से बड़ी मात्रा में बच्चों के लिए आया सरकारी चावल गायब कर दिया गया था। चोरी की भनक लगते ही जब मामले ने तूल पकड़ा और शिकायत चौकी तक पहुंची, तो उम्मीद थी कि पुलिस आरोपियों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजेगी।
लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। चौकी की चारदीवारी के भीतर कथित रूप से जिम्मेदारों और आरोपियों को बैठाकर घंटों 'पंचायत' चली। कानूनी प्रावधानों, एफआईआर और जब्ती की कार्रवाई को दरकिनार करते हुए मामले में लीपापोती कर दी गई और कथित तौर पर ‘समझौता’ करवाकर केस की फाइल ही बंद कर दी गई।
सरकारी संपत्ति की चोरी, फिर समझौता कैसे?
विधिक जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली या महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत आने वाला राशन शासकीय संपत्ति है। सरकारी राशन की चोरी केवल एक सामान्य चोरी नहीं, बल्कि आवश्यक वस्तु अधिनियम और बीएनएस/आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत संज्ञेय अपराध है। ऐसे मामलों में किसी भी पुलिस चौकी या अधिकारी को थाने स्तर पर 'समझौता' कराने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
क्षेत्र में आक्रोश, उठ रहे हैं तीखे सवाल:
खाकी पर सवाल: क्या नौनिहालों के हक का राशन चुराने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है?
जिम्मेदारों की खामोशी: महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक और उच्चाधिकारियों ने इस चोरी पर त्वरित एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई?
आखिर क्यों दबा मामला: क्या इस लीपापोती के पीछे कोई लेन-देन या सांठगांठ है?
नौनिहालों के मुंह से निवाला छीनने वालों और उन्हें बचाने वाले खाकीधारियों के खिलाफ यदि उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने मामले को लेकर उच्चाधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के समक्ष विरोध दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
इनका कहना है:
"आंगनबाड़ी के राशन में किसी भी प्रकार की अनियमितता या चोरी अक्षम्य है। यदि चौकी स्तर पर ऐसा कोई समझौता कराया गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। जांच कर नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"



