बैकुंठपुर (कोरिया)। न्यायालयों में अपराधियों की दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने और पुलिस विवेचना को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार झा की अध्यक्षता में कोरिया जिले में संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जुलाई और अगस्त माह के दौरान सेशन कोर्ट के 221 तथा निचली अदालतों के 570, कुल 791 दोषमुक्ति प्रकरणों की जिलेवार समीक्षा की गई। आईजी ने संबंधित अधिकारियों को मामलों में आरोपियों के बरी होने के कारणों की पहचान कर विवेचना की कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।
आईजी ने कहा कि दोषमुक्ति के प्रत्येक मामले की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि साक्ष्यों की कमी, प्रक्रियागत त्रुटि या विवेचना में किसी चूक के कारण अभियोजन पक्ष को नुकसान हुआ। उन्होंने ई-प्रॉसिक्यूशन के माध्यम से जिला अभियोजन अधिकारियों को समय पर चालान उपलब्ध कराने पर जोर दिया, जिससे न्यायालयीन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और तकनीकी खामियों से बचा जा सके।
बलात्कार और पॉक्सो मामलों की विवेचना पर विशेष जोर
बैठक में बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के मामलों में दोषसिद्धि की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। आईजी ने निर्देश दिए कि पीड़िता के धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान, जिसका समकक्ष प्रावधान अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 183 में है, को नियमानुसार न्यायालयीन कार्यवाही में प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि विचारण के दौरान पीड़िता अपने पूर्व कथन से विपरीत या पक्षद्रोही बयान देती है, तो मामले के तथ्यों और लागू कानून के अनुरूप आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए। वहीं, जांच में शिकायत या एफआईआर झूठी पाए जाने पर नियमानुसार खात्मा या खारिजी की प्रक्रिया अपनाने तथा झूठे आरोपों के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन जरूरी
आईजी ने सात वर्ष से अधिक सजा के प्रावधान वाले अपराधों में घटनास्थल पर फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) टीम की मौजूदगी में वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य विवेचना को मजबूत बनाने तथा न्यायालय में अभियोजन का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एनडीपीएस यानी मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की विवेचना में सामने आ रही कमियों को दूर करने के लिए विवेचकों को इकाई स्तर पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए, ताकि कानूनी प्रक्रिया का सही पालन हो और तकनीकी त्रुटियों के कारण मामले कमजोर न पड़ें।
लंबित अपराधों और साइबर अपराधों की भी समीक्षा
बैठक के दूसरे चरण में रेंज के सभी जिलों में अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा की गई। एक वर्ष से अधिक समय से लंबित अपराधों के त्वरित निराकरण के साथ एनसीआरपी, साइ-ट्रेन, नेटग्रिड, ई-समंस और ई-साक्ष्य जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग की प्रगति पर चर्चा हुई। इसके अलावा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की कार्ययोजना, सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और पुलिसकर्मियों के कल्याण से जुड़े विषयों की भी समीक्षा की गई।
संभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में डीआईजी/एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल, एसएसपी जशपुर लाल उमेद सिंह, एसपी कोरिया हरीश राठौर, एसपी बलरामपुर वैभव बैंकर, एसपी एमसीबी रत्ना सिंह सहित सरगुजा संभाग के संबंधित पुलिस अधिकारी और लोक अभियोजन अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य विवेचना की गुणवत्ता में सुधार, वैज्ञानिक साक्ष्यों का प्रभावी उपयोग और न्यायालयों में मामलों की पैरवी को मजबूत बनाना रहा।



