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मानवता की मिसाल बनी ‘अनोखी सोच’, असहाय महिला का कराया अंतिम संस्कार

सुनैना मरकाम के निधन पर संस्था ने संभाली जिम्मेदारी, विधि-विधान से दी अंतिम विदाई

By Admin · 24 Oct 2026 · 7 views
मानवता की मिसाल बनी ‘अनोखी सोच’, असहाय महिला का कराया अंतिम संस्कार

अम्बिकापुर। जब अपनों का सहारा भी न हो और मुश्किल घड़ी में मदद के लिए कोई सामने न आए, तब इंसानियत के लिए उठाया गया एक कदम किसी बड़ी उम्मीद से कम नहीं होता। सामाजिक संस्था ‘अनोखी सोच’ ने ऐसा ही संवेदनशील उदाहरण पेश करते हुए गंभीर बीमारी से जान गंवाने वाली असहाय महिला सुनैना मरकाम का पूरे विधि-विधान और रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कराया।

जानकारी के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय के सामने रहने वाली सुनैना मरकाम बकरी पालन कर किसी तरह अपना जीवनयापन करती थीं। उनका विवाह महज नौ महीने पहले हुआ था। हाल ही में अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

मुश्किल घड़ी में संस्था बनी सहारा

सुनैना के परिवार में उनके पति के अलावा कोई अन्य सदस्य या रिश्तेदार नहीं था। आर्थिक तंगी और इस असहनीय दुख के बीच अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना परिवार के लिए कठिन हो गया। ऐसे में परिजनों ने सामाजिक संस्था ‘अनोखी सोच’ से संपर्क कर मदद मांगी।

सूचना मिलते ही संस्था के सदस्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल पति को ढांढस बंधाया और अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। संस्था के कार्यकर्ताओं ने सुनैना की पार्थिव देह को गंगापुर मुक्तिधाम पहुंचाया, जहां हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

निस्वार्थ सेवा से पेश की इंसानियत की मिसाल

संस्था की इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सामाजिक सेवा केवल जरूरतमंदों की मदद तक सीमित नहीं, बल्कि दुख की सबसे कठिन घड़ी में किसी का सहारा बनने का नाम भी है।

स्थानीय नागरिकों ने ‘अनोखी सोच’ के सदस्यों की संवेदनशीलता और निस्वार्थ सेवा भावना की सराहना की। सुनैना को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दिलाने की इस पहल ने समाज में मानवीय संवेदना, सहयोग और परोपकार के महत्व को रेखांकित किया।

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