निगरानी नदारद, ठेकेदार बेखौफ नल-जल योजना में मनमानी
PWD एसडीओ ने कहा: सड़क खुदाई की कोई अनुमति नहीं दी गई
ग्रामीणों का आरोप घटिया पाइपलाइन, नियमों को ताक पर रखकर काम..!
राजेंद्र शर्मा
खड़गवां (मनेंद्रगढ़ उपखण्ड)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत संचालित नल-जल योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खड़गवां मुख्यालय से गुजरने वाले स्टेट हाईवे के किनारे महज चंद फीट की दूरी पर सड़क की खुदाई कर पाइपलाइन बिछाई जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस खुदाई के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) से कोई अनुमति नहीं ली गई है। ग्रामीणों के अनुसार लगभग दो से तीन किलोमीटर तक सड़क किनारे खुदाई की जा चुकी है। मौके पर मौजूद ठेकेदार के प्रतिनिधि ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) की अनुमति होने की बात कही, लेकिन सड़क खुदाई के संबंध में लोक निर्माण विभाग से कोई स्वीकृति नहीं ली गई।
PWD ने दी साफ सफाई
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के एसडीओ संजय भरिलया से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि विभाग द्वारा सड़क खुदाई की कोई अनुमति नहीं दी गई है।
भविष्य में योजना को होगा नुकसान?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर पाइपलाइन डाली जा रही है, वह मुख्य राज्य मार्ग है। भविष्य में सड़क चौड़ीकरण या मरम्मत कार्य के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे जल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है।
गुणवत्ता पर भी सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पाइपलाइन निर्धारित मापदंड और गहराई के अनुसार नहीं डाली जा रही है। कई स्थानों पर पाइप जमीन के ऊपर दिखाई दे रही है। यदि ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में पाइपलाइन टूटने और जल आपूर्ति ठप होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
निरीक्षण व्यवस्था पर उठे प्रश्न
आरोप है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी निर्माण कार्य का नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिससे ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से चल रही इस योजना में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच होती है तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। जल जीवन मिशन का उद्देश्य वर्ष 2024 तक हर घर नल से जल पहुंचाना है, लेकिन यदि निर्माण कार्य में ही लापरवाही और अनियमितता बरती गई, तो योजना का लाभ ग्रामीणों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।