शिक्षा विभाग की निगरानी फेल? आत्मरक्षा प्रशिक्षण में वित्तीय गड़बड़ी
बेटियों को सशक्त बनाने की योजना बनी भ्रष्टाचार का माध्यम
प्रशिक्षक लौटे, पैसा निकला — स्कूल में बड़ा घोटाला उजागर
आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना में बड़ा घोटाला उजागर बिना प्रशिक्षण राशि आहरित करने का आरोप, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
उदयपुर (जिला सरगुजा) | जिला सरगुजा के विकासखंड उदयपुर अंतर्गत ग्राम खम्हरिया स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खम्हरिया में शासन द्वारा संचालित रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना में गंभीर अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। योजना का उद्देश्य छात्राओं एवं बच्चों को आत्मरक्षा के गुर सिखाकर उन्हें सशक्त बनाना है, लेकिन विद्यालय में पदस्थ शिक्षक गोविंद कुमार सिंह पर बिना प्रशिक्षण कराए ही शासन की राशि आहरित करने का आरोप लगा है।
क्या है योजना का उद्देश्य?
शासन द्वारा प्रत्येक विद्यालय को आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए नियमित रूप से राशि उपलब्ध कराई जाती है, ताकि अधिकृत प्रशिक्षकों के माध्यम से छात्राओं को कराटे, जूडो एवं अन्य आत्मरक्षा तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा सके। योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को आत्मनिर्भर एवं सुरक्षित बनाना है, ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में स्वयं की रक्षा कर सकें।
प्रशिक्षकों को लौटाया गया, बच्चों को नहीं मिला प्रशिक्षण
विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, जब भी बाहरी प्रशिक्षक विद्यालय में प्रशिक्षण देने पहुंचे, तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि बाद में बुलाया जाएगा। बताया जा रहा है कि विद्यालय में केवल शिक्षक सुरेंद्र द्वारा कुछ दिनों तक औपचारिक प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन उसके बाद लगभग चार वर्षों तक कोई नियमित प्रशिक्षण आयोजित नहीं किया गया। इसके बावजूद योजना की राशि लगातार आहरित होती रही, जिससे पूरे मामले में संदेह गहराता जा रहा है।
नियमों की खुली अनदेखी
शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा सीधे प्रशिक्षण नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि अधिकृत प्रशिक्षकों की नियुक्ति कर प्रशिक्षण कराना अनिवार्य है। आरोप है कि इन नियमों की अनदेखी करते हुए बिना विधिवत प्रशिक्षण व्यवस्था के ही राशि निकाल ली गई। इससे योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही और संभावित वित्तीय अनियमितता की आशंका व्यक्त की जा रही है।
बच्चों के अधिकारों पर प्रश्न
आत्मरक्षा प्रशिक्षण जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य विशेष रूप से छात्राओं को सशक्त बनाना है। यदि उन्हें प्रशिक्षण से वंचित रखा गया, तो यह सीधे तौर पर उनके अधिकारों और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि समय पर प्रशिक्षण मिलता तो बच्चों में आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ती। ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग मामला उजागर होने के बाद ग्राम खम्हरिया में अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करने तथा आहरित राशि की वसूली की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं की गई तो वे उच्च अधिकारियों एवं शिक्षा विभाग के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। शिक्षा विभाग की निगरानी पर सवाल इस प्रकरण ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आखिर वर्षों तक बिना प्रशिक्षण के राशि आहरित होती रही और विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई । यह एक बड़ा सवाल बनकर उभरा है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल मामले में आधिकारिक जांच की मांग तेज हो गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी संभव है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण को कितनी प्राथमिकता से लेता है और बच्चों के हित में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।