वनांचल क्षेत्र में निगरानी शून्य, आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत चिंताजनक, तबादलों की मार से टूटी व्यवस्था, योजनाओं का लाभ अधूरा…!
बच्चों के पोषण पर लापरवाही? जांच की मांग तेज , रिकॉर्ड में योजनाएं पूरी, जमीनी हकीकत में अव्यवस्था..!
सोनहत के 185 आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल स्थिति, निगरानी अभाव से योजनाएं प्रभावित
निलेश सोनी
सोनहत (जिला कोरिया) वनांचल एवं दूरांचल क्षेत्र सोनहत में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र की 42 ग्राम पंचायतों में संचालित 185 आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में अव्यवस्था की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बच्चों और हितग्राहियों तक समुचित रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।
स्थानीय सूत्रों एवं जनप्रतिनिधियों के अनुसार, परियोजना अधिकारी द्वारा केंद्रों का नियमित निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन नहीं किए जाने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बताया जा रहा है कि न तो मासिक निरीक्षण हो रहा है और न ही केंद्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
निरीक्षण के अभाव में प्रभावित व्यवस्थाएं
निगरानी की कमी के कारण कई केंद्रों में पोषण आहार वितरण, बच्चों की उपस्थिति पंजी और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कुछ स्थानों पर रिकॉर्ड संधारण में भी अनियमितताओं की बात सामने आई है।
बार-बार तबादले से बाधित निगरानी तंत्र
महिला एवं बाल विकास विभाग में बीते एक-दो वर्षों के भीतर अधिकारियों के लगातार तबादले और प्रभार व्यवस्था के कारण स्थायी निगरानी तंत्र विकसित नहीं हो सका है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में निरंतरता का अभाव बना हुआ है और जवाबदेही तय करना कठिन हो रहा है।
एलईडी टीवी योजना भी ठप
सरकार द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास और डिजिटल शिक्षा के उद्देश्य से उपलब्ध कराए गए एलईडी टीवी कई आंगनबाड़ी केंद्रों में उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। कहीं उपकरण बंद पड़े हैं तो कहीं संचालन संबंधी मार्गदर्शन का अभाव बताया जा रहा है, जिससे बच्चों को डिजिटल शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वनांचल क्षेत्र की विशेष चुनौती
सोनहत का अधिकांश हिस्सा वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में 185 केंद्रों का प्रभावी संचालन और नियमित मॉनिटरिंग और भी अधिक जिम्मेदारी का विषय बन जाता है। किंतु निगरानी तंत्र की कमी से केंद्रों की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पा रही है।
जांच की उठी मांग
स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मामले में संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर विषय पर क्या कदम उठाता है और 185 आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था सुधारने के लिए कौन से ठोस निर्णय लिए जाते हैं।