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अस्तित्व और अधिकार की लड़ाई: बतौली में डीलिस्टिंग पर निर्णायक रणनीति बनी

Archive ID #1920
अस्तित्व और अधिकार की लड़ाई: बतौली में डीलिस्टिंग पर निर्णायक रणनीति बनी

बतौली में डीलिस्टिंग मुद्दे पर कार्यशाला सम्पन्न, दिल्ली में ‘गर्जना महारैली’ की तैयारी तेज

दिल्ली में बजेगा जनजातीय अस्मिता का बिगुल, बतौली कार्यशाला में बना रोडमैप

आदित्य गुप्ता

बतौली (सरगुजा)। डीलिस्टिंग के मुद्दे पर जनजातीय समाज की एकजुटता और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप की रणनीति तय करने के उद्देश्य से जनजाति सुरक्षा मंच, खंड बतौली द्वारा एक दिवसीय खंड स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आगामी दिल्ली में प्रस्तावित ‘डीलिस्टिंग जनजाति गर्जना महारैली’ की रूपरेखा, प्रचार-प्रसार, जनसंपर्क अभियान तथा अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनजाति सुरक्षा मंच जशपुर के प्रांत सह संयोजक इन्दर भगत ने कहा कि डीलिस्टिंग का विषय जनजातीय समाज के अस्तित्व, संवैधानिक अधिकार और पहचान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की सफलता के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।
जिला संयोजक बिहारीलाल उरांव ने जिला स्तर की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि इस विषय को सबसे पहले सांसद रहे कार्तिक उरांव ने उठाया था। उन्होंने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक निरंतर उठा रहा है और अभियान को निर्णायक परिणाम तक पहुंचाने के लिए संगठन दृढ़ संकल्पित है।
संरक्षक देवनाथ पैंकरा ने समाज से एकजुट होकर महारैली में अधिकाधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और ऐतिहासिक उपस्थिति से ही संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। संरक्षक जवाहर खलखो ने भी कार्यशाला को संबोधित करते हुए जनजागरूकता अभियान को ग्राम स्तर तक ले जाने पर जोर दिया।
कार्यशाला के दौरान सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को ग्राम स्तर पर संपर्क अभियान चलाकर लोगों को डीलिस्टिंग विषय की जानकारी देने तथा दिल्ली में प्रस्तावित महारैली में अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। कार्यक्रम का संचालन रज्जू राम ने किया तथा आभार प्रदर्शन संयोजक कलमू लड़का ने किया।
कार्यशाला में राजेंद्र पैकरा, श्रीराम भगत, राम कैलाश पैकरा, आदिया राम, करमचंद सिंह, सबल साय, बिंदेश्वर भगत, ढोलाराम विनोद पैंकरा, दीपक, सुपारस, जयकरण सिंह, पुरुषोत्तम सिंह, विष्णु गुप्त, श्रवण कुमार, पारस सचिन भगत, रामबिहारी पैकरा, मनोज, विकास लकड़ा, अभय प्रकाश, रामदेव पैकरा, भारत राम, सुरेंद्र कुमार, निरंजन मिंज, गणेश राम, सी.एल. उइके, अमृत राम, संदीप लकड़ा, चंदर लाल मिंज, सतानंद एवं पूनमचंद सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।