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हसदो नदी में रेत माफिया का तांडव: प्रशासन मौन, प्रकृति कराह रही

Archive ID #1876
हसदो नदी में रेत माफिया का तांडव: प्रशासन मौन, प्रकृति कराह रही

जनपद पंचायत सोनहत में अवैध खनन पर कड़ी निंदा, ग्रामीणों में उबाल..!

निलेश सोनी

सोनहत, जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)- जनपद पंचायत सोनहत क्षेत्र में बहने वाली हसदो नदी इन दिनों रेत माफियाओं के निर्मम दोहन का शिकार बनी हुई है। अवैध खनन की वजह से नदी की जलधारा और तलहटी संरचना बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लगातार हो रहे उत्खनन से नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ चुका है और जलस्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। अवैध खनन चरम पर, दिन-रात दौड़ रही मशीनें स्थानीय लोगों के अनुसार, भारी मशीनों और ट्रैक्टरों के जरिए दिन-रात रेत निकासी का काम जारी है। नियमों की खुलेआम अवहेलना करते हुए नदी के बीचों-बीच गहरे गड्ढे किए जा रहे हैं, जिससे जलधारा अवरुद्ध हो रही है।

पर्यावरणीय संकट गहराया

अनियंत्रित खनन से नदी की जड़-जकड़ (तलहटी संरचना) सूखने की कगार पर है। जलचर जीव-जंतुओं का अस्तित्व संकट में है और आसपास की कृषि भूमि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। भू-जल स्तर में गिरावट से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है।

प्रशासनिक मौन पर उठे सवाल

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी संदेह को जन्म दे रही है। अवैध खनन का यह सिलसिला लंबे समय से जारी है, लेकिन ठोस कार्रवाई का अभाव प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। राजस्व को करोड़ों का नुकसान
रेत माफिया जहां अवैध कमाई से मालामाल हो रहे हैं, वहीं शासन को लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। नियम-कायदों को ताक पर रखकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन खुलेआम जारी है।

जनाक्रोश बढ़ा, कार्रवाई की मांग तेज
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने उच्चस्तरीय जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो हसदो नदी केवल नाम मात्र की रह जाएगी और क्षेत्र पर्यावरणीय आपदा की ओर बढ़ सकता है।
यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ खुला अत्याचार है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक मौन साधे रहता है और कब इस गंभीर मुद्दे पर ठोस एवं निर्णायक कार्रवाई करता या नहीं ।