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वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था बदहाल

Archive ID #1684
वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था बदहाल

एकल शिक्षकों के भरोसे कई स्कूल, अटैचमेंट व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

कोरिया। कोरिया ज़िले के रामगढ़, सोनहत, बंशीपुर, उज्ञाव सहित अनेक वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से गंभीर संकट का सामना कर रही है। ज़िले के कई शासकीय विद्यालय आज भी केवल एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई, शैक्षणिक गुणवत्ता और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, एक शिक्षक पर कई कक्षाओं और विषयों का भार होने से नियमित अध्यापन प्रभावित हो रहा है। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर गिर रहा है और ड्रॉपआउट की आशंका भी बढ़ती जा रही है।
हाल के दिनों में कलेक्टर कोरिया की विशेष निगरानी में कुछ विद्यालयों में अस्थायी सुधार अवश्य देखने को मिला है, लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अटैचमेंट और अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे शिक्षा व्यवस्था को लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता।
अटैचमेंट संस्कृति पर कठोर सवाल
विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई शिक्षक वर्षों से अपनी मूल पदस्थापना छोड़कर शहरी या सुविधाजनक क्षेत्रों में अटैच हैं, जबकि दूरस्थ वनांचल विद्यालयों में शिक्षक संकट बना हुआ है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि विद्यार्थियों के संवैधानिक शिक्षा अधिकार पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

स्थानीय मांगें हुईं तेज

स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और शिक्षा प्रेमियों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कई
वर्षों से अटैच शिक्षकों को तत्काल उनकी मूल पदस्थापना पर भेजा जाए।
एकल शिक्षक विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की जाए।
वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान, गुणवत्तापूर्ण और नियमित शिक्षा सुनिश्चित की जाए।

नीति नहीं, ज़मीनी कार्रवाई की ज़रूरत
कलेक्टर कोरिया द्वारा शिक्षा सुधार की मंशा को सराहनीय बताते हुए जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने कहा कि सख़्त प्रशासनिक निर्णय और ठोस क्रियान्वयन के बिना यह अभियान अधूरा रहेगा। शिक्षा विभाग को अब टालमटोल छोड़कर निर्णायक कदम उठाने होंगे।

वनांचल के बच्चों का भविष्य अस्थायी इंतज़ामों का मोहताज नहीं होना चाहिए। यदि समय रहते अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त कर मूल पदस्थापना लागू नहीं की गई, तो यह लापरवाही आने वाली पीढ़ी पर भारी पड़ सकती है। अब आवश्यकता है कठोर निर्णय, स्पष्ट नीति और ज़मीनी कार्रवाई की ताकि शिक्षा वास्तव में विकास का माध्यम बन सके, न कि फाइलों की कैद।