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सरगुजा सुलग उठा: जल-जंगल-ज़मीन के लिए आदिवासियों का आर-पार का ऐलान

Archive ID #1646
सरगुजा सुलग उठा: जल-जंगल-ज़मीन के लिए आदिवासियों का आर-पार का ऐलान

“हमें ऐसा विकास नहीं चाहिए” — खनन के खिलाफ सड़कों पर उतरा सरगुजा

खनन के खिलाफ आर-पार की चेतावनी, आंदोलन को राज्यव्यापी करने का ऐलान

“जल-जंगल-ज़मीन हमारा है” — सरगुजा में आदिवासियों की हुंकार,अस्तित्व की लड़ाई: सरगुजा से उठा आंदोलन का अलार्म…!

आदित्य गुप्ता

सरगुजा। सरगुजा जिले में खनन परियोजनाओं और अंधाधुंध वनों की कटाई के खिलाफ जनजातीय समुदायों और ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। हजारों की संख्या में आदिवासी, महिलाएं और युवा जल-जंगल-ज़मीन की रक्षा के लिए एकजुट होकर सड़क पर उतरे और दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि अब उनके अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विकास के नाम पर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि संविधान, पर्यावरणीय कानूनों और ग्राम सभा की सहमति को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। जंगल तेजी से कट रहे हैं, जलस्रोत सूखते जा रहे हैं और पीढ़ियों से जंगल पर निर्भर आदिवासी समुदायों को अपने ही क्षेत्र से उजाड़ा जा रहा है।

“यह विकास नहीं, हमारा विनाश है”

रैली में शामिल लोगों ने कहा कि खनन परियोजनाएं सीधे उनके अस्तित्व पर हमला हैं। न रोजगार मिला, न सम्मानजनक मुआवजा—मिला तो केवल विस्थापन, प्रदूषण और आजीविका का संकट। महिलाओं और युवाओं ने प्रशासन से सवाल पूछते हुए कहा कि यदि यही विकास की परिभाषा है, तो उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं।

ग्राम सभा की अनदेखी पर उबाल

प्रदर्शन के दौरान तीखी नारेबाजी करते हुए आदिवासी नेताओं ने आरोप लगाया कि ग्राम सभाओं की राय को दरकिनार कर जबरन परियोजनाएं थोपी जा रही हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि खनन कार्य तत्काल बंद नहीं किए गए और ग्राम सभाओं की आवाज़ को सम्मान नहीं मिला, तो यह आंदोलन जिले की सीमाओं को पार कर राज्यव्यापी जनआंदोलन का रूप ले लेगा।

सिर्फ विरोध नहीं, अस्तित्व की लड़ाई

सरगुजा की सड़कों से उठी यह आवाज महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने हक, सम्मान और अस्तित्व की आखिरी लड़ाई का ऐलान है। आदिवासी समाज ने साफ कर दिया है कि जल-जंगल-ज़मीन उनके जीवन की बुनियाद है, और इसकी कीमत पर किसी भी तरह का विकास उन्हें स्वीकार नहीं।