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26 वर्ष की उम्र में सरगुजा के युवा साहित्यकार को मिला ‘युवा रत्न सम्मान’

Archive ID #1567
26 वर्ष की उम्र में सरगुजा के युवा साहित्यकार को मिला ‘युवा रत्न सम्मान’

संघर्षों के बीच साहित्य का सफर, तीन पुस्तकों के रचनाकार बने युवाओं की प्रेरणा

आदित्य गुप्ता

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा युवाओं को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदान किए जाने वाले युवा रत्न सम्मान से इस वर्ष सरगुजा जिले के एक युवा साहित्यकार को सम्मानित किया गया है। महज 26 वर्ष की उम्र में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अमित यादव ने यह उपलब्धि हासिल कर न केवल अपने जिले बल्कि पूरे अंचल को गौरवान्वित किया है।
स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत एक समूह पुरस्कार (₹5 लाख) तथा आठ व्यक्तिगत पुरस्कार (₹1-1 लाख) प्रदान किए गए, जिनमें साहित्य के क्षेत्र से अमित यादव का चयन हुआ।
12वीं से शुरू हुआ लेखन का सफर
अमित यादव ने बताया कि वर्ष 2017 में, 12वीं कक्षा के दौरान बड़े साहित्यकारों की रचनाओं से प्रेरित होकर उन्होंने लेखन की शुरुआत की। अब तक वे तीन पुस्तकें—AK अनकहे अल्फ़ाज़, Amit Hidden Words और मैं तुम्हें जानता हूँ—लिख चुके हैं। इसके अतिरिक्त दो पुस्तकों का संकलन, 25 से अधिक पुस्तकों में सह-लेखक के रूप में सहभागिता तथा गीत लेखन में भी उनकी सक्रियता रही है। अब तक उनके चार गीत रिलीज़ हो चुके हैं।
कठिन परिस्थितियों में भी नहीं छोड़ा साहित्य
अमित का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। पिता जल जीवन मिशन के अंतर्गत नाइट ड्यूटी करते हैं, जबकि परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण रही। 12वीं के बाद उन्होंने पढ़ाई में एक वर्ष का विराम लेकर निजी नौकरी शुरू की और वर्तमान में एक निजी एनजीओ में कार्यरत हैं। बावजूद इसके, रात के शांत समय को वे लेखन के लिए समर्पित करते हैं।
सम्मान तक की यात्रा भी रही चुनौतीपूर्ण
सम्मान मिलने की सूचना रविवार को मिली, जब तत्काल टिकट उपलब्ध नहीं थी। सीमित संसाधनों के बीच वे अपने पिता के साथ जनरल कोच से रातभर की यात्रा कर रायपुर पहुँचे और सुबह सीधे कार्यक्रम में शामिल हुए।
आगे की तैयारी
अमित यादव वर्तमान में अपनी चौथी पुस्तक—कहानियों के संग्रह—पर कार्य कर रहे हैं, जिसे वे शीघ्र पाठकों के समक्ष लाने की तैयारी में हैं।
युवा रत्न सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि यह संदेश है कि समर्पण, परिश्रम और जुनून के बल पर सीमित संसाधनों के बावजूद भी युवा अपनी पहचान बना सकते हैं। अमित यादव की यह सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।