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“ब्लैकमेलिंग नहीं, जनहित पत्रकारिता चाहिए” — आदित्य कुमार का दो टूक संदेश

Archive ID #1446
“ब्लैकमेलिंग नहीं, जनहित पत्रकारिता चाहिए” — आदित्य कुमार का दो टूक संदेश

पत्रकारिता की आड़ में उगाही बर्दाश्त नहीं, सच्चाई के साथ खड़े रहेंगे — आदित्य कुमार

सच के साथ, न सत्ता के साथ: जनपक्षीय पत्रकारिता का आह्वान

जनहित पत्रकारिता से ही मजबूत होगा लोकतंत्र, सच के लिए लड़ने वालों के साथ खड़ा रहेगा संगठन…!

अम्बिकापुर - पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और उसके सामने खड़ी चुनौतियों के बीच जनहित और नैतिक मूल्यों की रक्षा को लेकर एक सशक्त आवाज़ सामने आई है। पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता आदित्य कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पत्रकारिता का उद्देश्य सच सामने लाना है, न कि डर, धमकी और ब्लैकमेलिंग के ज़रिये अवैध उगाही करना। उनका यह बयान मौजूदा समय में पत्रकारिता की दिशा और दशा पर गंभीर मंथन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
आदित्य कुमार ने कहा कि किसी भी कार्य में कृत्य से अधिक मंशा मायने रखती है। अगर मंशा जनहित की है, तो पत्रकारिता समाज को जागरूक करने का सबसे सशक्त माध्यम बन सकती है। लेकिन जब इसी पेशे की आड़ में कुछ लोग निजी स्वार्थ, दबाव और उगाही का रास्ता अपनाते हैं, तो इससे न केवल पत्रकारिता की साख को ठेस पहुँचती है, बल्कि ईमानदार पत्रकारों का मनोबल भी कमजोर होता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका और उनकी टीम का प्रयास हमेशा यही रहेगा कि कानून का राज स्थापित हो, सच्ची, निर्भीक और जनपक्षीय पत्रकारिता को समर्थन मिले, और सच के लिए लड़ने वाले हर पत्रकार का हौसला बना रहे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी मजबूती सीधे तौर पर समाज और शासन की जवाबदेही से जुड़ी हुई है।

आदित्य कुमार ने यह भी साफ शब्दों में कहा कि पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग, धमकी और अवैध वसूली करने वालों का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। ऐसे कृत्य न केवल कानून के खिलाफ हैं, बल्कि पत्रकारिता की आत्मा के भी विरुद्ध हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ऐसे तत्वों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इसका खामियाजा पूरे पेशे को भुगतना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उनका संगठन न तो न्याय के खिलाफ है और न ही सत्ता के पक्ष में। उनका साथ केवल और केवल सच्चाई के साथ है चाहे वह किसी आम नागरिक के लिए हो या किसी पत्रकार के लिए। सच्चाई के पक्ष में खड़े होने का अर्थ यह नहीं कि किसी निर्दोष को बदनाम किया जाए या दबाव बनाकर लाभ उठाया जाए, बल्कि तथ्य, प्रमाण और जिम्मेदारी के साथ सच को सामने लाया जाए।

आदित्य कुमार ने समाज और पत्रकार समुदाय से अपील करते हुए कहा कि पत्रकारिता को फिर से उसकी गरिमा लौटाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। ईमानदार पत्रकारों को एक-दूसरे के साथ खड़ा होना होगा और गलत तत्वों को स्पष्ट रूप से अलग करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक पत्रकार खुद अपने पेशे की मर्यादा की रक्षा नहीं करेंगे, तब तक बाहर से सम्मान की अपेक्षा करना कठिन होगा।
अंत में उन्होंने कहा कि जनहित पत्रकारिता ही लोकतंत्र को मजबूत करती है। यह न तो डर से चलती है और न ही लालच से, बल्कि सच्चाई, साहस और जनसेवा की भावना से आगे बढ़ती है। आइए, मिलकर संकल्प लें कि पत्रकारिता को ब्लैकमेलिंग का औजार नहीं, बल्कि समाज के लिए एक भरोसेमंद आवाज़ बनाएँ।