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नेशनल हाईवे मरम्मत में करोड़ों का खेल! रातों-रात उखड़ी सड़क, भ्रष्टाचार की बू...!

Archive ID #1203
नेशनल हाईवे मरम्मत में करोड़ों का खेल! रातों-रात उखड़ी सड़क, भ्रष्टाचार की बू...!

अम्बिकापुर | अम्बिकापुर में नेशनल हाईवे की मरम्मत के नाम पर बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार करीब 6 करोड़रुपये की लागत से कराए जा रहे सड़क मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालात ऐसे हैं कि रात में की गई टायरिंग सुबह होतेही उखड़ गई, जिससे पूरे कार्य की पोल खुल गई। जानकारी के अनुसार, कड़ाके की ठंड के बावजूद ठेकेदार द्वारा रात करीब 12 बजे सड़क परडामरीकरण (टायरिंग) का काम शुरू कराया गया। स्थानीय लोगों ने उसी समय घटिया सामग्री और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए विरोधभी किया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। नतीजा यह रहा कि अगली सुबह सड़क का बड़ा हिस्सा उखड़कर बर्बाद होचुका था। सफाई कर्मचारियों की भी खुली आंखें सुबह जब नगर निगम के सफाई कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो हालात देखकर वे भी हैरान रह गए।रातों-रात की गई मरम्मत पूरी तरह बेकार साबित हुई। इससे साफ है कि सड़क सुधार के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। अहम सड़कों कीबदहाली यह सड़क सदर रोड, महामाया चौक और देवीगंज रोड जैसे शहर के प्रमुख मार्गों को जोड़ती है। इन इलाकों से रोजाना हजारों वाहन गुजरतेहैं। बावजूद इसके, घटिया डामर का इस्तेमाल कर जल्दबाजी में काम पूरा करने की कोशिश की गई, ताकि तस्वीरें खींचकर भुगतान निकाला जासके।

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जनता में भारी आक्रोश

शहरवासियों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से सड़कें जर्जर हालत में हैं। बरसात के दौरान सांसद, विधायक और महापौर ने सड़क सुधार का भरोसादिलाया था, लेकिन बरसात बीतने के बाद भी हालात जस के तस हैं। अब यह मरम्मत भी लोगों के लिए धोखे से कम नहीं है।

अधिकारी चुप, सवाल गहरे जब इस पूरे मामले पर वर्जन लेने के लिए नेशनल हाईवे के कार्यपालक अभियंता आरडी ताम्बरे और एसडीओ निखिललकड़ा से संपर्क किया गया, तो दोनों ने फोन रिसीव नहीं किया। अधिकारियों की यह चुप्पी भ्रष्टाचार के आरोपों को और मजबूत कर रही है। जांचनहीं हुई तो सड़कों पर उतरेगा गुस्सा स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो आने वाले दिनोंमें उनका आक्रोश सड़कों पर देखने को मिल सकता है। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कों की हालत बदतर क्यों? औरआखिर जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?