निलेश सोनी
तंजरा/खड़गवां (जिला कोरिया)।
तंजरा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव पलारीडाँड़ में विकास के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते दिखाई दे रहे हैं। गांव में नियमित बिजली आपूर्ति का अभाव है और जो सौर होम लाइटें कभी उम्मीद की किरण बनी थीं, वे भी लंबे समय से बंद पड़ी हैं। परिणामस्वरूप सूरज ढलते ही पूरा गांव अंधकार में डूब जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार शाम होते ही बच्चों की पढ़ाई ठप हो जाती है। कई विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन रोशनी के अभाव में उन्हें मजबूरन किताबें बंद करनी पड़ती हैं। मोबाइल चार्जिंग जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, जिससे आपात स्थिति में संपर्क साधना कठिन हो जाता है।
महिलाएं और बुजुर्ग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। अंधेरे के कारण रात्रि में आवागमन जोखिमभरा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सौर ऊर्जा योजना का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों को रोशन करना था, लेकिन मेंटेनेंस और जवाबदेही के अभाव में उपकरण निष्क्रिय हो गए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित विभाग को कई बार शिकायत की गई, परंतु अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। गांववासियों का कहना है कि यदि समय पर रखरखाव और निगरानी की व्यवस्था होती, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
नियमित और स्थायी बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बंद पड़ी सौर लाइटों की तत्काल मरम्मत या प्रतिस्थापन किया जाए।
जिम्मेदार विभाग द्वारा समयबद्ध कार्रवाई एवं निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
गांव में सुरक्षा एवं आपात सुविधाओं के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मुद्दा केवल पलारीडाँड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की व्यापक चुनौती को दर्शाता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कब तक संज्ञान में लेकर ठोस कार्रवाई करता है।