सरगुजा के भोले-भाले उपभोक्ताओं पर महंगाई के बीच ठगी का वार; 95% शुद्धता के नाम पर निकला 70% सोना
अंबिकापुर (विशेष संवाददाता)। बढ़ती महंगाई के इस दौर में पाई-पाई जोड़कर बेटियों के विवाह और संकट के समय के लिए सोने के आभूषण गढ़वाने वाले भोले-भाले नागरिकों को ठगने का बड़ा खेल शहर में सामने आया है। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र सरगुजा में आदिवासियों और सीधे-सादे उपभोक्ताओं के विश्वास का गला घोंटते हुए सर्राफा कारोबारियों द्वारा मिलावटी आभूषण थमाकर जेबें भरने का गंभीर मामला उजागर हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार, पीडि़त ग्राहक ने 2 दिसंबर 2020 को 24 कैरेट सोने के तत्कालीन भाव (लगभग 48,000 रुपये प्रति 10 ग्राम) के अनुसार सात थान जेवर (कुल वजन लगभग 75 ग्राम) तैयार करवाए थे। उस समय संचालक पंकज सोनी सदर रोड स्थित कदम्बी चौक, बोदला जड़ी-बूटी के पास 'पायल ज्वेलर्स' के नाम से प्रतिष्ठान चला रहा था।
दुकान और नाम बदला, जांच में खुली 25% मिलावट की पोल
हाल ही में जब ग्राहक को रुपयों की आवश्यकता पड़ी और वह जेवर बेचने उस स्थान पर पहुंचा, तो पता चला कि संचालक वहां से दुकान समेटकर गुदरी बाजार में 'सोनम ज्वेलर्स' के नाम से नया कारोबार शुरू कर चुका है। जब इन गहनों की अधिकृत केंद्र से शुद्धता जांच कराई गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ग्राहक से 95% से अधिक शुद्धता (24 कैरेट) का भुगतान लिया गया था, जबकि जांच में सोने की वास्तविक शुद्धता 70% (18 कैरेट से भी कम) निकली।
वर्तमान भाव देने से इनकार, दी धमकी
जब ग्राहक ने आज के बाजार मूल्य के अनुसार भुगतान की मांग की, तो संचालक पंकज सोनी अपने दायित्व से मुकरता दिखा। आरोप है कि संचालक ने ग्राहक को धमकाते हुए कहा— "जो करना है कर लो, मैं इससे ज्यादा पैसे नहीं दूंगा। जो दे रहा हूं, वह उस समय की कीमत से भी अधिक है।" इस घटना के बाद स्थानीय ग्राहकों में भारी रोष है और सवाल उठ रहे हैं कि सरगुजा अंचल में चल रहे इस मिलावट के सिंडिकेट का मुख्य कर्ताधर्ता कौन है?
राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद, छत्तीसगढ़ के सदस्य डॉ. नवीन श्रीवास्तव ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उपभोक्ताओं से सतर्क रहने की अपील की है।
"उपभोक्ता जागरूकता का अर्थ केवल वस्तु खरीदना नहीं, बल्कि सही जानकारी के साथ अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी है। यदि आभूषण की शुद्धता पर संदेह हो, तो अधिकृत जांच केंद्र से परीक्षण कराएं और उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराएं। न खुद धोखा खाएं, न किसी दूसरे को खाने दें।"
— डॉ. नवीन श्रीवास्तव, सदस्य, राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद, छत्तीसगढ़



