“प्रजा ही राजा: अफसरशाही नहीं, जनभागीदारी से चलेगा गाँव”
पंच परमेश्वर की वापसी: ग्रामसभा को सर्वोच्च बनाने का संकल्प”
लोकपाल से लेकर रोज़गार तक: पंचायत सुधार का व्यापक रोडमैप, गाँव का भविष्य गाँव तय करेगा: वास्तविक पंचायती राज की पहल…!
आदित्य गुप्ता
सरगुजा। छत्तीसगढ़ के गाँवों में पंचायती राज व्यवस्था को उसकी मूल आत्मा के साथ पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से एक व्यापक “महाअभियान” की शुरुआत की गई है। इस अभियान का मूल मंत्र है हमर गाँव, हमर पंचायत, हमर ग्रामसभा–हमर भविष्य। अभियान का स्पष्ट उद्देश्य ग्रामसभा को सत्ता का वास्तविक केंद्र बनाकर भ्रष्टाचार मुक्त पंचायती राज की स्थापना करना है।
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि पंचायती राज व्यवस्था में अफसरशाही या राजतंत्र नहीं, बल्कि सच्चा प्रजातंत्र होना चाहिए, जहाँ प्रजा ही राजा हो और ग्रामसभा सर्वोच्च निर्णयकारी मंच बने। वर्तमान में कई पंचायतों में व्याप्त भ्रष्टाचार को “कचरा” बताते हुए इसे हटाने के लिए सामूहिक स्वच्छता अभियान की आवश्यकता पर बल दिया गया। महाअभियान के तहत ग्रामसभा को मजबूत करने, पंच परमेश्वर की ऐतिहासिक अवधारणा को पुनर्जीवित करने और गाँव के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है। अभियान का मानना है कि गाँव का समग्र विकास तभी संभव है, जब ग्रामसभा में सभी की सक्रिय सहभागिता हो।
महाअभियान के प्रमुख उद्देश्य
अभियान का लक्ष्य गाँवों में आपसी भाईचारा मजबूत करना, पंचायतों को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना, ग्राम पंचायत स्तर पर लोकपाल व्यवस्था की पहल करना, ग्रामीण युवाओं को रोजगार व उचित मजदूरी दिलाना, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित करना तथा केंद्र व राज्य सरकार की जनहित योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। इसके साथ ही किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य, गुणवत्तापूर्ण बीज–खाद–दवाई की उपलब्धता, खेल एवं युवा कल्याण कार्यक्रमों का विस्तार, राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करना और संविधान सम्मत वास्तविक पंचायती राज व्यवस्था को लागू करवाना भी अभियान के प्रमुख बिंदु हैं। अभियान में यह भी संकल्प लिया गया है कि प्रत्येक गाँव में ग्राम विकास समिति का गठन कर ग्रामसभा को स्वशासन का केंद्र बनाया जाएगा तथा गाँवों को नशा मुक्त करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे।
अंत में महाअभियान के प्रमुख आदित्य गुप्ता ने युवाओं से आह्वान किया गया कि वे आगे आकर ग्रामसभा को मजबूत करें, अफसरशाही और नेतागिरी की जगह जनभागीदारी को प्राथमिकता दें और छत्तीसगढ़ की पंचायती राज व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।