शिकायत के बाद फाइलों में कथित हेरफेर, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
राजेंद्र शर्मा
खड़गवां (जिला कोरिया)। जनपद पंचायत खड़गवां एक बार फिर निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। कंप्यूटर भवन निर्माण से जुड़े दस्तावेजों में छेड़छाड़ और खसरा नंबर बदलने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि विभागीय लिपिक और संबंधित अधिकारियों की सांठगांठ से स्वीकृति फाइलों में हेरफेर किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिघत ग्राम पंचायत में कंप्यूटर भवन निर्माण के लिए प्रारंभिक स्वीकृति के समय एक खसरा नंबर (बताया जा रहा है कि खसरा नंबर 24) के दस्तावेज संलग्न किए गए थे। वहीं, शिकायत के बाद कथित रूप से फाइल से दस्तावेज हटाकर खसरा नंबर 28 से संबंधित कागजात जोड़े जाने की बात सामने आ रही है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस भूमि पर निर्माण कार्य कराया गया, वह पट्टे की भूमि थी और नियमानुसार यदि किसी निजी या पट्टे की भूमि पर शासकीय भवन निर्माण कराया जाता है, तो स्टांप पेपर पर विधिवत सहमति पत्र व भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अनिवार्य होती है। लेकिन इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के बाद आनन-फानन में संबंधित खसरा नंबर को लेकर समझौता पत्र तैयार किया गया। यह भी आरोप है कि संबंधित लिपिक लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं और उन्हें फाइल प्रक्रिया की पूरी जानकारी होने के कारण दस्तावेजों में हेरफेर करना आसान हो जाता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह मामला सत्य है तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए जा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराएगा? या फिर मामला अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा? जनपद पंचायत के संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग जोर पकड़ सकती है।