सिधी (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के सीधी–शहडोल–जनकपुर मार्ग अंतर्गत सिधी वार्ड क्रमांक–03 में स्थित अति प्राचीन झदवा कुआँ—जो वर्षों से स्थानीय जनमानस की आस्था और लोक-मान्यताओं का केंद्र रहा है—आज ग्राम पंचायत सिधी की घोर लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार का शिकार होता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बीते 7–8 महीनों से कुएँ के आसपास निर्माण सामग्री बेतरतीब पड़ी है। चारों ओर मलबा फैला हुआ है और कुएँ की जगत के किनारे गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया, जिससे विशेषकर बरसात के मौसम में आवागमन और सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कुआँ पूजा-पाठ का प्रमुख स्थल है और इसके जल को पवित्र मानकर संस्कारों में उपयोग किया जाता रहा है।
ऐसे पवित्र देव-स्थल पर फैली अव्यवस्था को लोग आस्था का अपमान बता रहे हैं। साथ ही, मूलभूत मद की राशि के दुरुपयोग की आशंका भी गहराती जा रही है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं—जब कार्य शुरू किया गया तो उसे पूरा क्यों नहीं किया गया? महीनों से सामग्री यूँ ही क्यों पड़ी है? क्या यह जनधन की खुली बर्बादी नहीं?
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत सिधी के सचिव और सरपंच की निष्क्रियता के कारण यह स्थिति बनी हुई है। देव-स्थल के नाम पर कार्य दिखाकर राशि हड़पने की गंभीर आशंकाएँ सामने आ रही हैं। यदि समय रहते गड्ढा नहीं भरा गया और स्थल का समुचित विकास नहीं किया गया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय जनता ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और प्राचीन झदवा कुएँ का सम्मानजनक संरक्षण व त्वरित सुधार कराया जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि आस्था, सुरक्षा और जनहित के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
— ग्राम पंचायत सिधी रिपोर्ट | बेनी माधव कुशवाहा